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स्थायी अपंगता हितलाभ

(क) एक बीमाकृत व्यक्ति, जो रोजगार चोट (व्यावसायिक रोग सहित) के परिणामस्वरूप और अर्जन क्षमता की हानि के परिणामस्वरूप स्थायी अशिष्ट अपंगता से पीड़ित है, को स्थायी अपंगता हितलाभ देय होगा । अर्जन क्षमता की हानि का निर्धारण उचित प्राधिकार अर्थात् चोटों के लिए चिकित्सा बोर्ड और व्यावसायिक रोगों के लिए विशेष चिकित्सा बोर्ड द्वारा किया जाएगा ।

(ख) यदि निर्धारण अनंतिम है तो चिकित्सा बोर्ड द्वारा दी गई अवधि के लिए या निर्धारण अंतिम है तो पूरे जीवन के लिए स्थायी अपंगता हितलाभ की मियाद होगी ।

(ग) स्थायी अपंगता हितलाभ दर: स्थायी अपंगता हितलाभ दर चिकित्सा बोर्ड/चि.अ.अ./अ.अ.हि. के संबंध में कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा निर्धारित अर्जन क्षमता की हानि की प्रतिशतता अनुसार निकाली जाएगी । क.रा.बी. अधिनियम 1948 की दूसरी अनुसूची में चोटों की सूची दी गई है जिसके परिणामस्वरूप स्थायी पूर्ण अपंगता और अर्जन क्षमता की हानि की प्रतिशतता पूर्वदर्शित की गई है । इस प्रकार स्थायी अपंगता हितलाभ की अधिकतम दर अस्थायी अपंगता हितलाभ की दर के बराबर हो सकती हैं ।

क.रा.बी. निगम मुद्रास्फीति के समायोजन हेतु समय-समय पर स्थायी अपंगता हितलाभ की राशि परिशोधित करता है । नवीनतम बढ़ोतरी 01.08.2009 से प्रभावी है ।

(घ) स्थायी अपंगता हितलाभ का संराशीकरण (विनियम 76-ख): जिस बीमाकृत व्यक्ति के स्थायी अपंगता हितलाभ का अंतिम निर्धारण हो चुका है और जिसे यह  रूपये 1.50 प्रतिदिन से कम की दर से दिया गया है तो वह स्थायी अपंगता हितलाभ के आवधिक भुगतान का संराशीकरण कर एकमुश्त देने के लिए आवेदन कर सकता है । चिकित्सा बोर्ड के निर्णय की सूचना की तारीख के 6 महीनों के अंदर जब संराशीकरण का आवेदन किया जाता है तब भुगतान का संराशीकरण कर एकमुश्त आवधिक भुगतान कर दिया जाता है बशर्ते कि अंतिम अधिनिर्णय के प्रारंभ के समय  10,000/- से अधिक कुल संराशीकृत मूल्य न हो । यद्यपि जहाँ 6 महीने बीतने के बाद ऐसा आवेदन किया जाता है तो शाखा कार्यालय/क्षेत्रीय कार्यालय मामले को चिकित्सा निर्देशी/अंशकालिक चिकित्सा निर्देशी को बीमाकृत व्यक्ति की आयु के लिए जीवन की प्रत्याशित आयु को प्रमाणित करने के लिए भेजेंगे । चिकित्सा निर्देशी द्वारा ऐसा प्रमाण पत्र क्षेत्रीय कार्यालय/शाखा कार्यालय के पत्र के संगत स्थान में जारी किया जाएगा ।

(ङ) प्रत्येक मामले में बीमाकृत व्यक्ति की आयु निगम की संतुष्टि के लिए साबित की जाएगी । चिकित्सा बोर्ड उन बीमाकृत व्यक्तियों की आयु का निर्धारण करेंगे जिन्होंने अपनी आयु का संतोषजनक सबूत नहीं दिया है और चिकित्सा बोर्ड की इस संबंध में राय अंतिम होगी ।

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948

"कर्मचारियों के लिए बीमारी, प्रसवकालीन और सेवाकाल की स्थिति में कुछ विशेष हितलाभ प्रदान करने तथा उनसे संबन्धित मामलों में उपबंध बनाने हेतु बनाया गया अधिनियम। "

कोई शंका होने पर कृपया ई-मेल आई॰ डी॰ : esic-hqrs@esic.in पर लिखें।

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