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- 10 या उससे अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले छोटे कारखानों की व्याप्ति को सुकर बनाना |
- आश्रितजन हितलाभ के लिए आश्रित बच्चों की आयु सीमा 18 वर्ष से बढ़ाकर 25 वर्ष किया जाना |
- जिन बीमाकृत व्यक्तियों का स्वयं का परिवार नहीं है तथा जिनके माता-पिता भी जीवित नहीं हैं, उनके मामले में उन पर आश्रित अवयस्क भाई/बहन के लिए चिकित्सा हितलाभ का विस्तार |
- चूककर्ता नियोजकों से देय राशियों के निर्धारण की प्रक्रिया को सुप्रवाही बनाना |
- राशि निर्धारण के विरुद्घ अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने के लिए निगम के अंतर्गत ही अपीलीय प्राधिकारी प्रदान करना |
- समयपूर्व सेवानिवृत्ति या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के अंतर्गत सेवानिवृत्त हो रहे बीमाकृत व्यक्तियों के लिए चिकित्सा हितलाभ जारी रखना |
- यात्र के दौरान हुई दुर्घटनाओं को रोजगार चोट के रूप में मानना |
- छूटों के अनुदान से संबंधित प्रक्रिया को सुकर बनाना |
- अस्पतालों को चलाने तथा प्रवर्तन करने में तृतीय पक्ष की सहभागिता |
- चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हेतु चिकित्सा/दंत्य/परा चिकित्सा/नर्सिंग महाविद्यालय खोलना |
- श्रम और रोजगार मंत्रलय द्वारा दिनांक 01.04.2008 से आरंभ की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना या केन्द्र सरकार द्वारा बनाई गई अन्य किसी योजना के अंतर्गत प्रयोक्ता प्रभारों के भुगतान पर अल्प प्रयोग क.रा.बी. अस्पतालों को अन्य लाभार्थियों के लिए चिकित्सा देखभाल हेतु समर्थ बनाने की व्यवस्था करना |
- स्थापनाओं के नए वर्गों के लिए अधिनियम के विस्तार हेतु नोटिस अवधि की मियाद को छह माह से एक माह तक कम करना |
- कार्य में प्रवीणता तथा स्वायत्तता लाने हेतु राज्यों में चिकित्सा हितलाभ प्रदान करने के लिए राज्य सरकारों को स्वायत्त निगमों का गठन किए जाने का अधिकार प्रदान करना |
- बीमा निरीक्षक अब सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के नाम से जाने जाएंगे |
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कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 |
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"कर्मचारियों के लिए बीमारी, प्रसवकालीन और सेवाकाल की स्थिति में कुछ विशेष हितलाभ प्रदान करने तथा उनसे संबन्धित मामलों में उपबंध बनाने हेतु बनाया गया अधिनियम। "
कोई शंका होने पर कृपया ई-मेल आई॰ डी॰ : esic-hqrs@esic.in पर लिखें।
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